उत्तरी भारत की आस्था का केन्द्र बागड़ का गोगामेड़ी धाम
भारत वर्ष में अनेक धर्मों सम्प्रदायों मजहबों के लोग रहते हैं और अलग अलग देवी देवताओं पीर पैगंबरो में अपनी मान्यतायें रखते हैं। उत्तर भारत में ऐसे ही लोकदेवता के रूप में विख्यात है जाहरवीर गोगा जी महाराज।
ऐसी ही एक आस्था का केंद्र है बागड़ का गोगामेड़ी धाम जो राजस्थान के हनुमानगढ़ ज़िले की नोहर तहसील में आता है। यहां जाहरवीर गोगा जी की समाधि बनी हुई है और गोगा जी के गुरु श्री गोरखनाथ जी का भी मंदिर बना हुआ है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गोगा जी सापों के देवता है और उनकी पूजा अर्चना से नागदेवता प्रसन्न हो जाते है। गोगाजी को जहां हिन्दू धर्म में गोगा वीर मान कर पूजते हैं, वहीं मुस्लिम पीर मान कर इनकी समाध पर माथा टेकते हैं। गोगा जी का जन्म विक्रमी सम्वत 1003 में चूरू में ददरेवा गांव में हुआ वहीं उनकी समाधि हनुमानगढ़ के मेड़ी में बनी हुई है। गोगा जी का यह धाम दिल्ली से करीबन 300 किमी दूर है और जयपुर से करीबन 400 किमी दूर है।
गोगामेड़ी धाम के लिए जयपुर , नई दिल्ली आदि प्रमुख स्टेशनो से रैल यातायात के द्वारा भी हम जा सकते हैं।
यह उत्तर भारत के सात राज्यों के श्रद्धालु हिन्दू मास भाद्रपद (भादवा ) में एक महीने तक शीश झुकाते है।
गोगामेड़ी धाम में जहां लाखों की संख्या में लोग माथा टेकते है वहीं यहां पशुओं का विशाल मेला लगता है जिसमे मुख्यत: ऊँट और बैल की ख़रीद बेच होती है और समस्त उत्तर भारत के व्यापारी अपनी पशुओं की ख़रीद बेच करने यहां आते है। गोगा मेडी धाम में प्रसाद के तौर पर मुख्यत नारियल चढ़ाया जाता है वही यहां का घेवर जिसे लोकल भाषा में खजला भी कहते है बहुत प्रसिद्ध है और स्वादिष्ट भी है।
गोगाजी के गुरु गोरखनाथ जी का टीला गोगामेड़ी से 2 किमी दूरी पर है जहाँ एक तरफ उनका मठ बना हुआ है वही दूसरी तरफ़ एक सरोवर बना हुआ है जिसमें सभी श्रद्धालु डुबकी लगा कर जाते है। मान्यता यह भी है कि इस सरोवर में स्नान करने से तन मन के सभी दोष ख़त्म हो जाते हैं। लोक मान्यता यह भी कि सर्प दंश से पीड़ित व्यक्ति को अगर गोगा मेडी धाम तक लाया जाये तो उसका सर्प दंश समाप्त हो जाता है।
गोगा जी का ये पर्व एक महीने तक चलता है जिसे भगतगण बागड़ यात्रा के नाम से भी जानते है। पूरे भादवा महीने में चलने वाला गोगा जी महाराज का यह मेला हिन्दू मुस्लिम एकता का जीवंत उदाहरण है जहां हिन्दू और मुस्लिम बिना किसी मजहबी भेदभाव के गोगा जी की समाधि पर माथा टेकते है।


Lakhs of people comes here every year
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