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रविवार, 21 फ़रवरी 2021

तंबाकू - एक जानलेवा लत


तंबाकू कितने समय से मानव जाति की साँसे छीन रहा है , इसका कोई पक्का प्रमाण तो नहीं है पर ऐसा कहा जाता है कि लगभग 8000 वर्ष पहले अमेरिका के जंगल में  तम्बाकू पहली बार पहचाना गया  था।  लगभग 2,000 साल पहले तंबाकू को सांस्कृतिक या धार्मिक समारोहों और आयोजनों के दौरान चबाया और धूम्रपान किया जाने लगा।
उस समय मानव जाति शायद जानती नहीं थी कि ये परम्परा एक  दिन जानलेवा लत बन जाएगी ।मौजूदा हालात में तंबाकू का उपयोग दुनिया भर में महामारी के अनुपात तक पहुँच गया है और धूम्रपान की प्रवृत्ति को उलटने के प्रयासों के बावजूद, समस्या केवल प्रत्येक वर्ष बड़ी होती जा रही है।
प्रत्येक वर्ष दुनिया भर में लगभग 6.5 ट्रिलियन सिगरेट बेची जाती हैं, जो प्रति दिन लगभग 18 बिलियन सिगरेट का अनुवाद करती है। वहीं अन्य तरीकों से तम्बाकू सेवन करने वालों का आंकड़ा भी करोड़ो में है। 
यह भी सुनने  में आया है कि दुनिया में अनुमानित एक बिलियन धूम्रपान करने वालों में से 80% निम्न और मध्यम आय वाले देशों में रहते हैं।
चीन, भारत और ब्राजील आज तीन सबसे बड़े तंबाकू उत्पादक देश हैं। आश्चर्य की बात है कि इन देशों  में धूम्रपान को लेकर जागरूकता निम्नतम स्तर पर है। 
तम्बाकू आज सभी धूम्रपान करने वालों में से लगभग आधी जनसंख्या को मौत के घाट उतार देता है ।
वैश्विक स्तर पर, तंबाकू से प्रति वर्ष छह मिलियन लोगों की मृत्यु होती है तथा हर पांच सेकंड में एक मौत होती है।
मरने वालों की कुल संख्या में से 600,000 धूम्रपान न करने वालों में से हैं, जो सेकेंड हैंड (लोगों के द्वारा छोड़े गए ) धुएं के संपर्क में थे। और 2030 तक अगर यह प्रवृत्ति जारी रही तो मरने वालों की संख्या बढ़कर आठ मिलियन हो जाएगी।
अमेरिका में हर पांच में से एक मौत का सीधा कारण धूम्रपान है, जो सालाना लगभग 480,000 मौतों, प्रति दिन 1,300 धूम्रपान से संबंधित मौतों, प्रति घंटे 54 मौतों या प्रति मिनट लगभग एक मौत का अनुवाद करता है।
आप जो भी सिगरेट पीते हैं, वह आपके जीवन से 5  से 11 मिनट कम करती  है। जीवन भर में, जो आपकी जीवन प्रत्याशा को 12 वर्ष तक कम कर सकता है।
हृदय रोग से होने वाली मौतों में से लगभग 25% और फेफड़ों की बीमारी से होने वाली मौतों में से 75% किसी भी अन्य कारण के बावजूद धूम्रपान के लिए सीधे जिम्मेदार हैं।



तो क्या ये कभी नहीं थमेगा , क्या इस लत के कारण यूँ ही लोग बेमौत मरते रहेंगे , शायद इसका कोई जवाब नहीं पर भारत के एक कोने से कुछ वीरांगनाएँ मन बना चुकी थी कि इस अभिशाप को मिटा के ही दम लेंगी। 
समय समय पर अनेक समाजसेवी संस्थाएं एन जी ओ तथा सरकारें तम्बाकू को रोकने का अभियान चला रही है पर समस्या जस की तस बनी हुई है। 
तम्बाकू उत्पादों से लगातार हो रहे स्वास्थय हानि पर अब हमें जाग जाने की जरूरत है। 




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