यह ब्लॉग खोजें

शुक्रवार, 26 फ़रवरी 2021

ऊर्जा संकट से बचने के लिए अक्षय ऊर्जा एक महत्वपूर्ण विकल्प

            ऊर्जा क्षेत्र में माइक्रोग्रिड के द्वारा  उपभोक्ता को उत्पादक बनाने की जरुरत


इक्कसवीं सदी का भारत आज हर क्षेत्र में तरक्की कर रहा है, चाहे वो कृषि का क्षेत्र हो, उद्योगधंधे हो या व्यवसाय। लेकिन इन सभी की नींव अगर टिकी है तो वो है ऊर्जा -विद्युत् ऊर्जा या बिजली।  बिना विद्युत् ऊर्जा के  आज हम सुबह से लेकर शाम तक किसी भी क्रिया की कल्पना नहीं कर सकते।  हर पल हर कदम पर हमे विद्युत् ऊर्जा की आवश्यकता है।  लोगों ने छोटी से छोटी जरुरत के लिए विद्युत् ऊर्जा का उपयोग करना शुरू कर दिया है और यही कारण  है कि देश में पिछले कुछ सालों से लगातार विद्युत् ऊर्जा के उत्पादन में बढ़ावा करने के बाबजूद भी कहीं न कहीं ऊर्जा संकट नजर आ रहा है।  
यह अनुमान लगाया जा रहा है कि वर्ष 2035 तक ऊर्जा की मांग 41  प्रतिशत तक और बढ़ सकती है।  विद्युत् ऊर्जा उत्पादन के जानकारों का ये मानना है कि अगर इसी तरह से विद्युत् ऊर्जा का उपयोग बढ़ता रहा तो आने वाले कुछ सालों में ऊर्जा उत्पादन का मुख्य स्रोत कोयला धरती से खत्म  हो जायेगा जिससे कि ऊर्जा के उत्पादन में जबरदस्त गिरावट आएगी। इसलिए इस भयानक समस्या से निपटने के लिए ऊर्जा के दार्शनिको ने समय रहते अक्षय ऊर्जा की और अपना रुझान करना शुरू कर दिया है। अक्षय ऊर्जा जिसमे मुख्य रूप से सौर ऊर्जा आती है वहीं जैव ऊर्जा,पवन ऊर्जा  इत्यादि भी इसी का हिस्सा है।
             अगर हम सिर्फ सौर ऊर्जा की ही बात करें तो एक वर्ष में सूर्य से मिलने वाली ऊर्जा , पूरे विश्व की ऊर्जा मांग से कई गुना है,यानि कि अकेले सौर ऊर्जा से ही हम पूरे विश्व की ऊर्जा की मांग को आसानी से पूरा कर सकते है।   वहीं हमारे देश में सोलर पावर प्लांट लगाने का खर्च प्रति मेगावाट पुरे दुनिया से कम आता है। साथ ही साथ कृषि और पशुपालन से मिलने'वाले जैव पदार्थों से जैव ऊर्जा के उत्पादन की और भी विशेष ध्यान देने की जरुरत है।
आज विश्व के अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में अग्रणी देश आइसलैंड ,स्वीडन ,कॉस्ट रिका ,यू के ,डेनमार्क और जर्मनी जहां प्रति व्यक्ति अक्षय ऊर्जा उत्पादन विश्व में सबसे ज्यादा है , उन देशों ने किस तरह की नीतियां ऊर्जा उत्पादन में लागू की है, उसी तरह की नीतियों को हमारे देश में करने की जरुरत है।  आइसलैंड जहां 100 प्रतिशत ऊर्जा की मांग अक्षय ऊर्जा से पूरी करता है , वही कॉस्ट रिका 99 प्रतिशत ऊर्जा का भरपाई अक्षय ऊर्जा से करता है।  
           जब इन छोटे छोटे देशों ने स्वयं को ऊर्जा क्षेत्र में इतना शक्तिशाली बना रखा है तो हमारे देश में ये सब क्यों नहीं हो सकता, बस आवश्यकता है कि हम अक्षय ऊर्जा से संबधित नयी तकनीकों को हमारे देश में स्थापित करें।आज दुनिया के जो देश ऊर्जा क्षेत्र में अग्रणी है वहां सिर्फ सरकारें ही ऊर्जा उत्पादन के लिए जिम्मेवार नहीं बल्कि वहां के नागरिक भी इस को लेकर बड़े गंभीर है और सरकारों का पूरा योगदान दे रहे है।
                   आज हमें देश में इस तरह की योजनाएं लागू करने की जरुरत है, जिससे देश का हर परिवार अपने जरुरत के हिसाब से स्वयं ऊर्जा उत्पादन करके खुद को जहाँ ऊर्जा के क्षेत्र में आत्म-निर्भर बनाये वहीं जरुरत से ज्यादा उत्पादन करके सरकार को विक्रय भी करें। इससे एक तरफ जहाँ सरकारों को ऊर्जा उपलब्ध करवाने के लिए ज्यादा सोचना नहीं देना पड़ेगा वहीं यह कदम हर परिवार के लिए आमदनी का भी स्रोत बन जायेगा। दुनिया के कई देशों में इस तरह के प्रोजेक्ट चल भी रहे हैं जहां उपभोक्ता बिजली का उपयोग करने के उपरांत अतिरिक्त उत्पादन करके बिजली कंपनियों को आपूर्ति कर रहा है। उदाहरण के तौर पर किसान जहां अपनी खेत की मुंडेरों पर व ख़ाली पड़ी भूमि में सोलर ऊर्जा आधारित बिजली पैदा कर सकता है, वही वो अपनी कृषि अवशेष और पशु धन अवशेष से जैव ऊर्जा आधारित बिजली भी पैदा कर सकता है। ऊर्जा उत्पादन को आज व्यवसाय बना कर पेश करने की आवश्यकता है जिससे आम जान का इस विषय की और ध्यान केंद्रित कर सके। जिस तरह से सरकारों ने पिछले कुछ समय में पीली रोशनी को सफ़ेद रोशनी में बदलने के प्रयास किए हैं और उसमे सफलता भी पायी है, ठीक उसी तरह फिर एक अभियान चला कर हर परिवार को सौर और जैव ऊर्जा के प्रति जागरूक करके जोड़ने की आवश्यकता है। अगर निकट भविष्य में इस तरह की योजनाओं को अमलीजामा पहनाया जाता है तो  योजनाकारों का यह कदम देश में ऊर्जा क्रांति लाने का काम करेगा। 

  आने वाले समय में जिस तरह से पारम्परिक ऊर्जा उत्पादन के संसाधनों में कमी का अंदेशा है,उससे निपटने के लिए अक्षय ऊर्जा एक बेहतर विकल्प हो सकता है। हमारे देश में जहां सौर ऊर्जा के क्षेत्र में अनेक संभावनाएं हैं वहीं  कृषि प्रधान देश होने के चलते  जैव ऊर्जा में भी अनेक संभावनाएं तलाशी जा सकती है। निष्कर्ष में यहीं कह सकते हैं की ऊर्जा संकट से बचने के लिए अक्षय ऊर्जा के उत्पादन में जहां और अधिक लाभकारी और प्रभावशाली नीतियां बनाने की जरुरत है वहीं मौजूदा समय में चल रही योजनाओं को वास्तविकता के धरातल पर उतारने की भी आवश्यकता है।

1 टिप्पणी: