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गुरुवार, 4 मार्च 2021

बच्चों को अच्छे स्कूल में भेजने के बावजूद है आत्मविश्वास की कमी,जानिए वजह

 


आजकल के दौर में जहां शिक्षा का आधुनिकीकरण हो चुका है और सब कुछ मोबाइल व कम्प्युटर से हो रहा है वहां बच्चों में दिन प्रतिदिन लिखावट का महत्व कम होता जा रहा है। यह कोई ज्यादा पुरानी बात नहीं है जब बच्चे स्कूल में तख्ती लेकर जाते थे और अपनी लिखावट को सुधारने के लिए तख्ती लिखते थे। इससे बच्चे में जहां एक तरफ लिखावट में सुधार आता था वहीं लिखने के दौरान अशुद्धियां भी कम होती थी। 

सुलेख के लिए लगाई गई अलग कॉपी और उसमें मिलने वाले प्रोत्साहन के बाद अलग ही आत्मविश्वास आता था। बच्चों में सारा दिन तख्ती को धोने,सुखाने और पोंचने को लेकर एक उत्साह रहता था और स्याही को अच्छे ढंग से बनाना तो हर एक के बस की बात ही नहीं थी। 

लेकिन बदलती हुई शिक्षा प्रणाली ने तख्ती जैसे महत्वपूर्ण भाग को अपने पाठ्यक्रम से निकाल दिया है और यही कारण है कि आज बच्चों की लिखाई अच्छे स्कूलों में पढ़ने के बावजूद भी अच्छी नहीं है।बदलते समय के साथ हम यह मान सकते हैं कि आज लिखने का कोई ज्यादा काम रह नहीं गया है क्योंकि सब कुछ ऑनलाईन हो गया है पर फिर भी लिखावट व्यक्ति का एक गुण है जो कहीं न कहीं प्रदर्शित हो ही जाता है।


आज के बच्चें जहां हिन्दी के शब्द सही तरीके से नहीं लिख पाते वहीं जो लिखते हैं वो समझ नहीं आ पाता । अध्यापक व स्कूल, बच्चों की अंकतालिका को सजाने के चलते आज शिक्षा की मुख्य खूबियों से बहुत दूर जा चुके हैं, और इसी का परिणाम है कि आज बच्चों में आत्मविश्वास की कमी इस कदर है कि एक अर्जी तक नहीं लिख पाते।
मेरा इस लेख के पीछे यह मकस्द नहीं कि हम तख्ती प्रणाली पुनः शुरू करें परंतु  बच्चों की लिखाई की और आज हमे पुनः गौर करने की आवश्यकता है।

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